मै दादा का छोटा अर्जुन


ॐ । श्री कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ।

परमपूजनीय पांडुरंगशास्त्री आठवलेजी के स्वाध्याय परिवार से प्रचलित बाल-संस्कार केंद्र में, आज गीता जयंती के अवसर पर 'मै दादा का छोटा अर्जुन' इस विषय पर कुछ पंक्तियां पूजनीय दादाजी के चरणों में समर्पित ।


'मै दादा का छोटा अर्जुन' 


मै दादा का छोटा अर्जुन, हृदय में हो नित्य गीता गुञ्जन ।

हे हृदि सन्निविष्ट नारायण, चित्त धरें नित्य तव चरण ।

जीवन के इस नित्ययज्ञ में, नियत कर्म की हो आहुति ।

कर्मफलतृष्णा से रहित हो, कर्माधिकार की हो प्राप्ती ।।



मै दादा का छोटा अर्जुन, करू सदा मै गीता पठण ।

तत्वज्ञान का सूक्ष्म मनन हो, चूकें कभी ना निदिध्यासन ।

अभ्युदय की सबके जीवन में, लक्षणीय हो गती ।

निःश्रेयस के भी मार्ग पर मंद न हो प्रगती ।

हे योगेश्वर ! तव वचन न कदा विस्मरे मति ।

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति ।



मै दादा का छोटा अर्जुन, करूं सदा मै स्वधर्मपालन ।

भयावह परधर्म कभी न, आकर्षित करें हे यदुनंदन !

बाहु हमारे सदा प्रबल हो, क्षात्रधर्म में सदा तत्पर हो ।

अधर्म के वह विरुद्ध सिद्ध हो । अहिंसक, सज्जनहितकर हो ।।



मै दादा का छोटा अर्जुन, सखा तुम्हारा हे मधुसूदन ।

स्थान तुम्हारा हृदय-सिंहासन, स्वकर्मकुसुम से हो तव अर्चन ।

नीरज सदा रहें अंतःकरण, अलिप्तता हो स्वाभाविक गुण ।

मातृभूमि की सेवा विलक्षण, हे करुणानिधे हो प्रत्येक क्षण ।

हे भगवन ! यदि पद पद पर भी, सन्मुख यदि हो युद्ध का क्षण ।

कर्तव्यपथ पर हो पदाक्रमण, मन में रहे तुम्हारा ही स्मरण ।।


ॐ तत् सत् कृष्णार्पणमस्तु ।


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