हमारा घर !!!
जो जो घर से था भटका ..
मार्ग दिखाएँ उसे घर का ..
घर की ओर फ़िर मुड़ने का..
क्यूँ भला मन करे सब का ?
हम सब जो घर में रहते है ..
क्या उसे सजाएँ रखते है ?
इस घर की प्रत्येक वस्तू की,
क्या देख-भाल हम करते है ?
घर के छत की हानी जब हो,
क्या हम उसे सुधारते है ?
समय समय पर दीवारों को,
क्या हम चाह से रंगते है ?
घर की जो जो क्षति हुई है,
क्या हम ठ़ीक कराते है ?
सभी सदस्य मिल-जुल कर,
क्या एक कुटुम्ब बनाते है ?
सुबह का भूला सूरज ढ़लते,
घर लौट़ जाएं चलते चलते..
ऐसी उसके मन में आशा..
क्या हम सब बो पाते है ?
-पङ्कज 🪷
०५.०८.२३
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