अनन्तकोटी ब्रह्माण्डनायक मर्यादापुरूषोत्तम राम !!! !
अनन्तकोटी ब्रह्माण्डनायक,
जिनको लगते है एक याचक..
बेचारे, एक झोंपडी मे रहते..
नव-अवतार की राह है तकते ...
एक दिन मसीहा आ जाएगा ..
प्रभू के लिए वह घर बनाएगा..
फिर अवतार वह कहलाएगा..
आगामी चुनाव वही जीतेगा..
सत्ता का ही तो है सब खेल ..
सत्य से जिसका नही है मेल..
निर्णय भले है न्यायालय का ..
व्यापार हो रहा देवालय का..
'जय श्रीराम' तो बिकता है जी ..
दमडी दे कर में मिलता है जी..
ऐसा जिनका है मन्तव्य ..
सत्ता मात्र है उनका गन्तव्य ..
सच है यह की प्रभू बिकते है ..
सच्चे भाव से वह मिलते है ..
भाव का परंतु अभाव जहा है ...
प्रभुजी का शठ स्वभाव वहा है ..
🪷🙏🏽
( ०४.०१.२३ )


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