गांधी तो थे मरे नही !
गांधी तो थे मरे नही !
गांधीजी का वध नही, वह हत्या ही कहलाएगी ।
गांधीजी के हत्यारे को, दुनिया ना भूल पाएगी ।
जब गांधी है मारे जाते, नथुराम की गोली से ।
तब होता है अग्नीतांडव, अविवेक की होली से ।
तभी हुआ था ज्ञात सबको, गांधी तो थे मरे नही ।
गोली खा कर अमर बने वह, और नथुराम डरे नही ।
देश-विचार से प्ररित भले ही, नथुराम की करनी थी ।
परंतु उनकी कीमत सबने बहुतही भारी चुकाई थी ।
सत्य, अहिंसा के अभिनय का सत्य जब गोचर हुआ था ।
हिंसा तथा अधर्म का नंगा, नाँच सभी ने देख लिया था ।
गांधी- विचारधारा को , खंडित अगर करना होता ।
दुर्विचार पर सद्विचार को, दृढ़ प्रस्थापित करना था ।
विचार के बदले विचार बो कर, विचार पलटे जाते है ।
धर्म-भूमि पर विवेक-पानी पा कर वह फल-फूलते है ।
आज गांधीजी बनने की, लालसा सहज दिखती है ।
नोटों पर बैठे गांधी की, बढ़ती मोहिनी दिखती है ।


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